Kanpur Ganga Mela History: भारत के उत्तर प्रदेश का सबसे भौकाली शहर कानपुर है जहां के लोग मैं नहीं हम करके बात करते हैं. ये उनका अंदाज है और वो दुनिया में कहीं भी किसी के सामने नहीं झुकते हैं. कनपुरियों का अलग ही अंदाज होता है और वो होली का त्योहार भी 6 दिनों तक मनाते हैं. जहां देशभर में सभी होली वाले दिन खेलकर खत्म कर देते हैं और अगले दिन से काम पर लौट जाते हैं, वहीं कानपुर में 6 दिनों तक होली खेली जाती है और ये कोई रीति-रिवाज नहीं है बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ी ऐतिहासिक कहानी है.
क्या गुरू, दुनिया भर में होली एक-दो दिन में निपट जाती है, लेकिन हम कनपुरिया 6 दिनों तक रंग, गुलाल उड़ाते हुए धमाल मचाते हैं, काहे? हम मनमर्जी के मालिक हैं इसलिए? या फिर हम जब तक चाहें तब तक होली मनाएंगे जो मना करेगा तो फोड़ देंगे, ऐसा भौकाल बनाने के लिए? नहीं भईया….कानपुर में 6 दिन होली मनाने का एक इतिहास है जो अंग्रेजों से जुड़ा है, चलो गुरु आज हम इसी टॉपिक पर आप सबको बताते हैं.
कानपुर में 6 दिन क्यों मनाते हैं होली? (Kanpur Ganga Mela History)
तो बात है 1942 की जब 3 मार्च के दिन होली पड़ी थी. उस समय भारत अंग्रेजों का गुलाम था और होली के दिन ही ब्रिटिश हुकूमत ने कानपुर के करीब 45 क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारियों के विरोध में शहर ने सात दिनों तक होली नहीं खेली और किसी के घर में पकवान तक नहीं बने थे। कानपुर वालों ने इसी तरह अंग्रेजों का विरोध किया और मजबूर होकर अंग्रेजों को सातवें दिन यानी 9 मार्च को क्रांतिकारियों को छोड़ना पड़ा। 9 मार्च 1942 को कानपुर में पहला गंगा मनाया गया और पहला जश्न सरसैया घाट पर हुआ। इसी के बाद से हर साल सरसैया घाट समेत कानपुर के कई घाटों पर गंगा मेला के मौके पर होली मिलन समारोह होता है। कनपुरिया एक बार होली पर रंग ना खेलें लेकिन गंगा मेला वाले दिन रंग जरूर खेलते हैं।
तो आप सब भी जमकर गंगा मेला पर होली खेलो. कानपुर के दिलचस्प इतिहास और फिल्मी किस्सों के लिए मेरे चैनल फिल्मी किस्से को सबस्क्राइब करें। अगर मेरा ये वीडियो पसंद आया तो लाइक कमेंट और अपने कनपुरिया दोस्तों के साथ शेयर जरूर करो। चलते हैं गुरु, अपना ख्याल रखना।
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